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बिहार में डेथ सर्टिफिकेट अब 24 घंटे में मिलेगा, लोगों को नहीं काटने पड़ेंगे ऑफिस के चक्कर

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बिहार में नई व्यवस्था के तहत अब 24 घंटे में डेथ सर्टिफिकेट मिलेगा। ई-मेल, व्हाट्सएप और ऐप के जरिए आसानी से सर्टिफिकेट हासिल करें, और भ्रष्टाचार से छुटकारा पाएं।

पटना: बिहार सरकार ने अब डेथ सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तेज़ बना दिया है। अब किसी भी मृतक के परिजन को सर्टिफिकेट के लिए लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत 24 घंटे के भीतर ई-मेल, व्हाट्सएप या मोबाइल एप के माध्यम से डेथ सर्टिफिकेट मिल जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुविधा देना और भ्रष्टाचार तथा अवैध वसूली पर रोक लगाना है। इसके चलते अब दलालों द्वारा सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर वसूली करना लगभग असंभव होगा।

पंचायतों को मिली नई जिम्मेदारी

पंचायती राज विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए वार्ड सदस्यों को जिम्मेदार बनाया है। गांव में किसी भी कब्रिस्तान, श्मशान घाट, मोक्ष धाम या शवदाह गृह का प्रभारी वार्ड सदस्य होगा। अंतिम संस्कार या शवदाह के बाद, वार्ड सदस्य संबंधित डेटा पंचायत सचिव-सह-रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराएंगे।

इस प्रक्रिया के जरिए पंचायत स्तर पर सही और अपडेटेड डेटा सुरक्षित रहेगा। इससे न केवल प्रशासनिक काम आसान होगा बल्कि मृतक के परिजनों को भी जल्दी और सरल तरीके से सर्टिफिकेट प्राप्त होगा।

डेथ सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?

डेथ सर्टिफिकेट सिर्फ औपचारिक दस्तावेज नहीं है। यह बीमा दावा, पेंशन, संपत्ति उत्तराधिकार और अन्य सरकारी योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए अनिवार्य होता है। पहले इस सर्टिफिकेट के लिए 21 दिनों तक इंतजार करना पड़ता था और कई बार भ्रष्टाचार के कारण अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ता था।

नई व्यवस्था से अब परिजन सिर्फ 24 घंटे में फोन या डिजिटल माध्यम से सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। इससे सरकारी कार्यालयों के बाहर लंबी कतारों की समस्या भी खत्म होगी।

कैसे मिलेगा डेथ सर्टिफिकेट?

बिहार में सर्टिफिकेट प्राप्त करने का तरीका अब मृतक के स्थान के आधार पर तय होगा।

गांव में निधन होने पर – अगर किसी व्यक्ति का निधन उसी पंचायत क्षेत्र में हुआ है, तो पंचायत सचिव ही सर्टिफिकेट जारी करेंगे।

पंचायत क्षेत्र से बाहर निधन होने पर – मृतक के परिजन को जिला कार्यालय से सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा।

इसके अलावा, अगर परिवार चाहता है तो हार्ड कॉपी के लिए पंचायत कार्यालय भी जा सकते हैं।

डिजिटल माध्यम से मिलेगी सुविधा

नई व्यवस्था में डेथ सर्टिफिकेट अब डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध होगा। यह ई-मेल, व्हाट्सएप और मोबाइल एप के जरिए सीधे परिजनों को भेजा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोग बिना कार्यालय आने-जाने के सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकारी प्रक्रिया सरल और तेज होगी और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

भ्रष्टाचार और अवैध वसूली पर अंकुश

पहले लोग सर्टिफिकेट के लिए ऑफिस के चक्कर काटते और कई बार दलालों द्वारा वसूली का सामना करना पड़ता था। नई प्रणाली के लागू होने के बाद यह पूरी तरह रोका जा सकेगा। अब डेटा सीधे वार्ड सदस्य से पंचायत सचिव तक जाएगा और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

ग्रामीण इलाकों में लोगों को मिली राहत

बिहार के गांवों में लंबे समय से लोग डेथ सर्टिफिकेट प्राप्त करने में परेशानी झेलते थे। इसके चलते उन्हें कई बार शहर जाकर दस्तावेज जमा करने और लंबी कतारों में खड़े रहने की नौबत आती थी। नई डिजिटल व्यवस्था से यह समस्या समाप्त होगी।

सरकारी योजनाओं में लाभ मिलेगा

सर्टिफिकेट जल्दी मिलने से बीमा दावों की प्रक्रिया तेज होगी। पेंशन, संपत्ति का उत्तराधिकार और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भी यह लाभकारी है। परिजन अब ज्यादा समय और पैसा बचा पाएंगे।

निष्कर्ष

बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से सहूलियत लेकर आई है। 24 घंटे में डेथ सर्टिफिकेट मिलने की व्यवस्था ने न केवल भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि परिजनों को मानसिक और समय की राहत भी दी है।

नई डिजिटल प्रक्रिया से मृतक के परिजन अब आसानी से और तेज़ी से सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं। आने वाले समय में यह पहल पूरे राज्य में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार का उदाहरण साबित होगी।

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